क्यूँ अँधेरी है शब-ए-ग़म है बलाओं का नुज़ूल
आज उधर ही को रहेगा दीदा-ए-अख़्तर खुला
“Why is the night of sorrow so dark, with woes descending?Today, the stars' eyes will remain open, gazing that way.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
दुःख की रात इतनी अँधेरी क्यों है और विपत्तियाँ क्यों उतर रही हैं? आज रात तारों की आँखें उसी ओर खुली रहेंगी।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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