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क्या रहूँ ग़ुर्बत में ख़ुश जब हो हवादिस का ये हाल नामा लाता है वतन से नामा-बर अक्सर खुला

What joy can I find in exile, when such is calamity's plight,The messenger from home often brings open letters to my sight.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं परदेस में कैसे खुश रहूँ जब मुसीबतों का यह हाल है? वतन से आने वाला डाकिया अक्सर खुले हुए खत लाता है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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