Sukhan AI
करता काश नाला मुझ को क्या मालूम था हमदम कि होगा बाइस-ए-अफ़्ज़ाइश-ए-दर्द-ए-दरूँ वो भी

I wish I hadn't cried out, my friend, how could I know,That it too would make my inner sorrow grow?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

काश मैं रोता नहीं, ऐ दोस्त, मुझे क्या पता था कि यह भी मेरे अंदरूनी दर्द को और बढ़ा देगा।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.