करते हो मुझ को मनअ-ए-क़दम-बोस किस लिए
क्या आसमान के भी बराबर नहीं हूँ मैं
“Why do you forbid me from kissing your feet?Am I not even equal to the sky?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तुम मुझे अपने कदमों को चूमने से क्यों रोकते हो? क्या मैं आसमान के भी बराबर नहीं हूँ?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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