'ग़ालिब' वज़ीफ़ा-ख़्वार हो दो शाह को दुआ
वो दिन गए कि कहते थे नौकर नहीं हूँ मैं
“Ghalib, now a pensioner, offer the king your prayer,Gone are the days you'd declare, 'I am no servant here!'”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ालिब, अब तुम वज़ीफ़ा-ख़्वार हो (पेंशनर हो), बादशाह को दुआ दो। वे दिन चले गए जब तुम कहते थे कि मैं नौकर नहीं हूँ।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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