सुब्ह-ए-क़यामत एक दुम-ए-गुर्ग थी 'असद'
जिस दश्त में वो शोख़-ए-दो-आलम शिकार था
“The morn of Judgment Day was but a wolf's tail, Asad,In that wild where the charmer of both worlds was hunting.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
असद, जिस दश्त में वह दोनों जहानों का दिलकश शिकार कर रहा था, वहाँ क़यामत की सुबह सिर्फ़ एक भेड़िये की दुम थी।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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