ताऊस-ए-दर-रिकाब है हर ज़र्रा आह का
या-रब नफ़स ग़ुबार है किस जल्वा-गाह का
“A peacock in the stirrup is each particle of a sigh,O Lord, what splendor's dust, is this fleeting breath nearby?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
आह का हर कण ऐसा है जैसे रकाब में मोर हो. हे प्रभु, यह साँस, जो धूल के समान है, किस भव्य प्रदर्शन-स्थल का हिस्सा है?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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