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बोसा नहीं दीजिए दुश्नाम ही सही आख़िर ज़बाँ तो रखते हो तुम गर दहाँ नहीं

If no kiss, then do give me curses, that's alright; after all, you possess a tongue, even if you have no mouth (for a kiss).

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अगर आप चुंबन नहीं देते, तो ठीक है, गालियां ही दे दीजिए। आखिर आपके पास जुबान तो है, भले ही आप होंठ (चुंबन के लिए) न रखते हों।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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