हर-चंद जाँ-गुदाज़ी-ए-क़हर-ओ-इताब है
हर-चंद पुश्त-ए-गर्मी-ए-ताब-ओ-तवाँ नहीं
“Though soul-tormenting is the wrath and displeasure,Though no support of strength or power remains.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यद्यपि आत्मा को गलाने वाला क्रोध और अप्रसन्नता है, और शक्ति व सामर्थ्य का कोई सहारा नहीं है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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