बेकसी-हा-ए-शब-ए-हिज्र की वहशत है है
साया ख़ुर्शीद-ए-क़यामत में है पिंहाँ मुझ से
“Oh, the dread of separation's helpless nights, it is so deep! My own shadow hides from me, even in the sun of Doomsday.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जुदाई की बेबस रातों का खौफ बहुत ज़्यादा है; यहाँ तक कि क़यामत के तेज़ सूरज में भी मेरी परछाई मुझसे छिपी हुई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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