न देखें रू-ए-यक-दिल सर्द ग़ैर-अज़ शम-ए-काफ़ूरी
ख़ुदाया इस क़दर बज़्म-ए-'असद' गर्म-ए-तमाशा हो
“May no cold-hearted face be seen, save the camphor lamp's light, O God, may 'Asad's' assembly be so warmed by this sight!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
काफ़ूर की शमा के अतिरिक्त किसी ठंडे दिल वाले का चेहरा न दिखे। हे ईश्वर, 'असद' की महफ़िल इतनी गर्मजोशी और रौनक से भरी हो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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