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नहीं बहार को फ़ुर्सत हो बहार तो है तरावत-ए-चमन ख़ूबी-ए-हवा कहिए

Spring has no leisure, or if spring isn't there, still it is so; Call it the garden's freshness, the beauty of the air.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

बसंत को फ़ुर्सत नहीं मिलती, या अगर बसंत का मौसम न भी हो, तो भी उसकी उपस्थिति है। इसे बाग़ की ताज़गी और हवा की सुंदरता कहिए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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