मेहरबाँ हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त मैं गया वक़्त नहीं हूँ कि फिर आ भी न सकूँ

“Be kind and summon me whenever you desire; I am not time gone by that I cannot return.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

आप जब चाहें मेहरबानी करके मुझे बुला लें; मैं बीता हुआ वक़्त नहीं हूँ कि वापस न आ सकूँ।

विस्तार

यह शेर महबूब से एक बेहद कोमल और आत्मीय दरख़्वास्त है। शाइर कहता है कि जब भी आपका दिल चाहे, थोड़ी सी मोहब्बत और इनायत से मुझे पुकार लीजिए, क्योंकि मैं बीता हुआ वक़्त नहीं हूँ जो कभी लौटकर न आ सके। इसमें अपने प्यार को बचाने की ललक, जुदाई का दर्द और महबूब के लिए हमेशा खुला रहने वाला दिल साफ़ झलकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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