Sukhan AI
दौड़े है फिर हर एक गुल-ओ-लाला पर ख़याल सद-गुलसिताँ निगाह का सामाँ किए हुए

My thought again races over every rose and tulip,Having made a hundred gardens the provision for my gaze.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरा ख़याल फिर से हर फूल और लाला पर दौड़ता है, मानो निगाह ने सौ बागों को अपना सामान बना लिया हो।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.