फिर शौक़ कर रहा है ख़रीदार की तलब
अर्ज़-ए-मता-ए-अक़्ल-ओ-दिल-ओ-जाँ किए हुए
“Again, my longing seeks a buyer now,Having put forth mind, heart, and life as wares.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
फिर से मेरा शौक़ (इच्छा) किसी ख़रीदार की तलाश कर रहा है, जिसने अपनी बुद्धि, हृदय और प्राणों को सामान के रूप में पेश किया हुआ है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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