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हम मश्क़-ए-फ़िक्र-ए-वस्ल-ओ-ग़म-ए-हिज्र से 'असद' लाइक़ नहीं रहे हैं ग़म-ए-रोज़गार के

Asad, with contemplation of union and pangs of separation's strife,We're no longer fit for the mundane sorrows of this worldly life.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

असद, मिलन की सोच और जुदाई के दुख के अभ्यास से, हम अब रोज़गार के दुखों के लायक नहीं रहे हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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