ब-तूफ़ाँ-गाह-ए-जोश-ए-इज़्तिराब-ए-शाम-ए-तन्हाई
शुआ-ए-आफ़्ताब-ए-सुब्ह-ए-महशर तार-ए-बिस्तर है
“Within the stormy surge of the anguish of loneliness's evening, The sunbeam of Resurrection's dawn is but a thread of my bed.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अकेली शाम की बेचैनी के तूफानी माहौल में, क़यामत की सुबह की सूरज की किरण मेरे बिस्तर का एक धागा मात्र है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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