अभी आती है बू बालिश से उस की ज़ुल्फ़-ए-मुश्कीं की
हमारी दीद को ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा आर-ए-बिस्तर है
“Still from the pillow comes the scent of her musk-scented hair, For my longing gaze, Zulaikha's dream is the bed's disgrace.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अभी भी उसके कस्तूरी-जैसे बालों की सुगंध तकिए से आ रही है। हमारी देखने की इच्छा के लिए ज़ुलेख़ा का ख़्वाब (सपना/इच्छा) बिस्तर की लज्जा (शर्मिंदगी) है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
