कहूँ क्या दिल की क्या हालत है हिज्र-ए-यार में 'ग़ालिब'
कि बेताबी से हर-यक तार-ए-बिस्तर ख़ार-ए-बिस्तर है
“What can I say, Ghalib, of my heart's state in separation's plight? Each thread of the bed, from restlessness, feels like a thorn tonight.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ालिब, मैं अपने प्रिय की जुदाई में अपने दिल की क्या हालत बताऊँ? इतनी बेचैनी है कि बिस्तर का हर धागा काँटे जैसा महसूस होता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
