था ज़ब्त बहुत मुश्किल इस सैल-ए-मआ'नी का कह डाले क़लंदर ने असरार-ए-किताब आख़िर

“To stem this surging flood of meaning proved too hard a task; at last, the free-souled mystic revealed the hidden secrets of the Book.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

अर्थों और भावों के इस सैलाब को रोके रखना बहुत मुश्किल था, इसलिए आख़िरकार क़लंदर ने किताब (कुरान) के छिपे हुए राज़ बयान कर ही दिए।

विस्तार

यहाँ शायर रूहानी ज्ञान और गहरे अर्थों के उस उमड़ते हुए सैलाब की बात कर रहे हैं, जिसे दिल में रोक पाना नामुमकिन हो गया था। सूफ़ी परंपरा में आत्मिक रहस्यों को अक्सर राज़ ही रखा जाता है, लेकिन जब सत्य की प्रेरणा एक तूफ़ान की तरह उमड़ती है, तो कोई बंदिश टिक नहीं पाती। आखिरकार उस बेपरवाह क़लंदर ने दुनियावी झिझक तोड़कर उस मुक़द्दस किताब के सारे छुपे हुए राज़ खोल कर रख दिए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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