न पूछो मुझ से लज़्ज़त ख़ानमाँ-बर्बाद रहने की
नशेमन सैकड़ों मैं ने बना कर फूँक डाले हैं
“Do not ask me about the intoxication of living in luxury, / For I have blown out the lamps of hundreds of such pleasures.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मुझसे यह मत पूछो कि लज़्ज़त के खानों में बर्बाद होने का कैसा नशा है, क्योंकि मैंने तो सैकड़ों ऐसे नशेमन (आनंद के दीपक) जलाकर बुझा दिए हैं।
विस्तार
यह शेर उस जीवन की बात करता है जो पूरी तरह से जिया गया है, चाहे वह जीवन 'ख़ाक' या उजड़े हुए में ही क्यों न रहा हो। शायर कह रहे हैं कि आप मुझसे इस तरह की ज़िंदगी के मज़ा का सवाल मत पूछिए.... क्योंकि मैंने ऐसे सैकड़ों नशा-ए-मन (ख़ुशी के पल) खुद बना कर बुझा दिए हैं। यह एक ज़बरदस्त बयान है कि उन्होंने जीवन को बहुत गहराई से जिया है।
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