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नहीं बेगानगी अच्छी रफ़ीक़-ए-राह-ए-मंज़िल से ठहर जा शरर हम भी तो आख़िर मिटने वाले हैं

Oh, don't be lonely with a companion on the path to the destination, oh spark; we too are destined to perish.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

हे शरर, मंजिल के रास्ते पर साथी बनकर अकेलेपन में मत रहना; हम भी तो आखिरकार मिटने वाले हैं।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी के सफर और एहसास की सच्चाई को समझाता है। शायर यहाँ एक बेचैन आत्मा से कह रहे हैं कि ज़िंदगी के रास्ते पर अकेलापन कोई अच्छा हमसफ़र नहीं हो सकता। हमें याद दिलाते हैं कि हम सब भी नश्वर हैं, इस दुनिया में बस एक पड़ाव हैं। यह शेर हमें यह स्वीकार करना सिखाता है कि हर चीज़, हर एहसास, एक दिन बदल जाता है।

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