इश्क़ तिरी इंतिहा इश्क़ मिरी इंतिहा
तू भी अभी ना-तमाम मैं भी अभी ना-तमाम
“The climax of my love is your climax; you are not yet complete, and I am not yet complete.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
इश्क़ की चरम सीमा (इंतिहा) तुम्हारी है और मेरी भी। तुम अभी पूरे नहीं हुए हो और मैं भी अभी पूरा नहीं हुआ हूँ।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ इश्क़ की बात नहीं करता, बल्कि ज़िंदगी के उस पहलू को छूता है जहाँ इंसान को खुद को भी अधूरा स्वीकार करना पड़ता है। शायर कहते हैं कि मेरा इश्क़ तुम्हारी इंतिहा से जुड़ा है, लेकिन सबसे ख़ूबसूरत बात यह है कि न आप पूरी हैं, और न मैं। यह एहसास है कि हर कहानी, हर रिश्ता, अभी भी लिखा जाना बाकी है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
