हल्क़ा-ए-सूफ़ी में ज़िक्र बे-नम ओ बे-सोज़-ओ-साज़
मैं भी रहा तिश्ना-काम तू भी रहा तिश्ना-काम
“In the circle of Sufism, the mention of a name without fire or music, I too remained thirsty for desire, and you too remained thirsty for desire.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
सूफ़ी महफ़िल में नाम का ज़िक्र बिना आग या संगीत के, मैं भी काम की प्यास में रहा और तू भी काम की प्यास में रहा।
विस्तार
यह शेर एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जब सूफी महफ़िल में चर्चा हुई, तो वह बेजान और बे-रौनक थी। लेकिन, इस माहौल की बेजानता के बावजूद, शायर का कहना है कि न केवल वह, बल्कि उनका महबूब भी 'काम' (परम सत्य) की प्यास से भरे रहे। यह एहसास दिलाता है कि रूह की प्यास कभी बुझती नहीं, भले ही ज़माना कितना भी बेपरवाह क्यों न हो।
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