गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद न बेगाना-वार देख है देखने की चीज़ इसे बार बार देख

“Look not upon this garden of existence as an estranged stranger; it is a sight truly worth beholding, gaze upon it again and again.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

इस अस्तित्व रूपी बाग को अजनबियों की तरह मत देखो; यह ऐसी चीज़ है जो देखने योग्य है, इसलिए इसे बार-बार देखो।

विस्तार

शायर इस पूरी कायनात और ज़िंदगी को एक खूबसूरत बाग़ की तरह देखते हैं और समझाते हैं कि इसमें किसी बेगाने या अजनबी की तरह मत गुज़रो। यह दुनिया महज़ बेपरवाही से देखने के लिए नहीं, बल्कि इसमें डूबकर इसके हुस्न और रूहानियत को शिद्दत से महसूस करने के लिए है। कुदरत का हर करिश्मा इतनी गहराई और सच्चाई समेटे हुए है कि इसे जितनी बार देखो, उतनी बार एक नया राज़ खुलता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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