माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

“I grant that I am not worthy of your sight, yet behold my yearning, behold my enduring wait.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं तुम्हारा दीदार करने के योग्य नहीं हूँ, लेकिन तुम मेरी लगन और मेरा इंतज़ार तो देखो।

विस्तार

यहाँ आशिक़ बड़ी सादगी और विनम्रता से स्वीकार करता है कि शायद वह अपने महबूब के दीदार के लायक नहीं है, लेकिन उसका प्यार किसी हैसियत का मोहताज नहीं। वह महबूब से कहता है कि मेरी क़ाबिलियत को परखने के बजाय मेरे दिल का बेपनाह शौक़ और तुम्हारे लिए किया गया अटूट इंतज़ार देखो। यह शेर सिखाता है कि सच्ची मोहब्बत में पात्रता नहीं, बल्कि समर्पण की गहराई और तड़प ही सबसे बड़ी इबादत बन जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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