“Let those step forward who cannot find their way; I keep kindling the lamps along the road.”
जिन लोगों को रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है वे आगे कदम बढ़ाएं, क्योंकि मैं रास्ते में दीये रोशन करता जा रहा हूँ।
इस शेर में शायर एक ऐसे हमदर्द रहबर की तरह सामने आता है, जो दूसरों की राह आसान करने के लिए खुद मशक़्क़त झेलता है। 'चराग़-ए-राह' यानी रास्ते के दिए उम्मीद, समझ और हौसले का प्रतीक हैं, जो भटके हुए लोगों को रास्ता दिखाते हैं। शायर खुद आगे निकलने के बजाय उन लोगों को आगे बढ़ने का न्योता दे रहा है जो अंधेरे में उलझे हैं; यह शेर इंसानियत और निस्वार्थ मार्गदर्शन की खूबसूरत मिसाल है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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