“Between youth and beauty a debate has begun; ever-new facets keep unfolding, one by one.”
जवानी और हुस्न के बीच एक बहस छिड़ गई है, जिसमें लगातार नए-नए पहलू सामने आते जा रहे हैं।
यहाँ शायर ने जवानी और हुस्न को दो ऐसे साथियों की तरह पेश किया है जो आपस में एक प्यारी सी नोक-झोंक में उलझ गए हैं कि महबूब को ज़्यादा दिलकश कौन बना रहा है। इस दिलचस्प मुकाबले में कोई हारता या जीतता नहीं, बल्कि हर पल महबूब की अदाओं का एक नया और अनोखा रंग सामने आ जाता है। यह शेर उम्र के उस हसीन दौर की तस्वीर खींचता है जहाँ ताज़गी और नज़ाकत मिलकर देखने वाले को पूरी तरह मदहोश कर देती हैं।
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