“What a strange turn of fate time brings, how brief my tale appears: this head, now a heavy burden on my shoulders, once rested upon the beloved's lap.”
ज़माने का कैसा अजीब बदलाव है और मेरी संक्षिप्त कहानी बस यही है कि जो सिर आज कंधों पर बोझ बना हुआ है, वही कभी महबूब की गोद में हुआ करता था।
यह शेर ज़िंदगी और वक़्त के बेरहम बदलाव की एक बेहद मार्मिक तस्वीर पेश करता है। कभी जो सर महबूब की गोद में बड़े सुकून और नाज़ से टिका रहता था, आज तन्हाई और ग़म के आलम में वही सर अपने ही कंधों पर एक भारी बोझ महसूस होता है। शायर ने महज़ चंद लफ़्ज़ों में यह गहरा दर्द बयान कर दिया है कि कैसे वक़्त का पहिया घूमते ही ज़िंदगी का सबसे हसीन सुकून, वजूद के सबसे भारी अज़ाब में बदल जाता है।
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