मिरी सम्त से उसे ऐ सबा ये पयाम-ए-आख़िर-ए-ग़म सुना अभी देखना हो तो देख जा कि ख़िज़ाँ है अपनी बहार पर

“O morning breeze, convey from me this final message of despair: Come see me now, if see you must, for autumn blooms in full splendour here.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

ऐ सुबह की हवा, मेरी तरफ़ से उसे मेरे ग़म का यह आख़िरी पैग़ाम पहुँचा दे कि अगर मुझे देखना है तो अभी आकर देख ले, क्योंकि मेरी ख़िज़ाँ (बर्बादी) अपने चरम पर है।

विस्तार

शायर सुबह की ठंडी हवा यानी 'सबा' को अपना दूत बनाकर महबूब तक ग़म का यह आख़िरी पैग़ाम भेज रहा है। इस शेर की जान वो खूबसूरत विरोधाभास है जहाँ पतझड़ (ख़िज़ाँ) के 'बहार पर होने' की बात कही गई है। शायर कहना चाह रहा है कि उसके दर्द, इंतज़ार और बर्बादी का आलम अब अपने चरम पर पहुँच चुका है; अगर महबूब को मिलना है तो फौरन आ जाए, क्योंकि इसके बाद तो शायद यह वजूद ही ख़त्म हो जाएगा।

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