हर जल्वे को देखा तिरे जल्वों से मुनव्वर हर बज़्म में तू अंजुमन-आरा नज़र आया

“I saw every manifestation illumined by your radiant light; in every gathering, you appeared as the grace adorning the assembly.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मैंने हर दृश्य को तुम्हारे ही रूप और प्रकाश से रोशन देखा, और हर महफ़िल में तुम्हीं उस सभा की शोभा बढ़ाते हुए नज़र आए।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के उस रूहानी मुक़ाम को बयां करता है जहाँ आशिक़ को कायनात की हर चीज़ में सिर्फ़ अपने महबूब का ही नूर दिखाई देता है। शायर कहता है कि इस दुनिया की हर महफ़िल की रौनक़ और हर ख़ूबसूरती असल में उसी एक की मौजूदगी से रोशन है। जब दिल में ऐसी मोहब्बत उतर जाती है, तो चाहे कोई भी बज़्म हो या नज़ारा, नज़र हर जगह उसी एक अज़ीज़ चेहरे को पा लेती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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