“Let someone proclaim across every bower: A hundred thousand perils beset a single nest.”
कोई जाकर हर बाग़ में यह कह दे कि घोंसला तो बस एक ही है, लेकिन उस पर लाखों मुसीबतें और ख़तरे मँडरा रहे हैं।
शायर इस शेर में एक बेहद नाज़ुक घोंसले और उस पर मँडराते अनगिनत ख़तरों का दर्द बयां कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि पूरे बाग़ को यह बताया जाए कि किस तरह ज़िंदगी की तमाम बलाएँ एक ही मासूम आशियाने पर टूट पड़ी हैं। यहाँ 'नशेमन' सिर्फ़ तिनकों का घोंसला नहीं, बल्कि इंसान का नाज़ुक दिल और उसका वजूद है, जो दुनिया के बेरहम तूफ़ानों के बीच अकेले जूझ रहा है।
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