दर्द-ओ-ग़म-ए-फ़िराक के ये सख़्त मरहले हैराँ हूँ मैं कि फिर भी तुम इतने हसीं रहे

“Through these harsh trials of parting's grief and pain, / I marvel how so beautiful you still remain.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जुदाई के दर्द और ग़म के इन कठिन दौरों के बावजूद, मैं हैरान हूँ कि तुम अब भी इतने ख़ूबसूरत बने रहे।

विस्तार

जुदाई का दर्द और तन्हाई इंसान के चेहरे और रूह पर अपनी गहरी लकीरें छोड़ जाते हैं। लेकिन शायर यहाँ बड़ी हैरत और मुहब्बत से अपने महबूब को देखता है, जिसका हुस्न इस मुश्किल वक़्त के बाद भी ज़रा भी फीका नहीं पड़ा। इसमें महबूब के लाजवाब हुस्न की तारीफ़ तो है ही, साथ ही दिल के किसी कोने में यह सवाल भी छुपा है कि क्या इस जुदाई का दर्द महबूब को छू भी नहीं पाया।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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