मिज़ाज-ए-गिरामी की हो ख़ैर या-रब कई दिन से अक्सर वो याद आ रहे हैं

“May all be well with their noble grace, O Lord, / For days now, they come so constantly to mind.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

हे ईश्वर, मेरे महबूब की ख़ैरियत और सलामती बनी रहे, क्योंकि पिछले कई दिनों से वे मुझे बहुत ज़्यादा याद आ रहे हैं।

विस्तार

यह शे'र दिल के उस नाज़ुक वहम और बेपनाह मोहब्बत को बयान करता है, जब किसी की यादें अचानक बिना रुके आने लगती हैं। हमारे यहाँ अक्सर यह माना जाता है कि अगर कोई मुसलसल याद आए, तो शायद वह किसी परेशानी में है या वह भी हमें शिद्दत से याद कर रहा है। इसलिए शायर अपनी बेचैनी को दुआ में बदलकर रब से अपने महबूब की सलामती और खैरियत की इल्तिजा करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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