Sukhan AI
जो जन भीगे रामरस , विगत कबहूँ ना रूखअनुभव भाव दरसते , ना दु: ना सुख113

Whoever is bathed in the nectar of Rama, never again is there any sorrow. Neither joy nor sorrow, nor experience or emotion are seen.

कबीर
अर्थ

जो व्यक्ति राम के रस में भीग जाता है, उसे कभी कोई दुख नहीं होता। उसमें न सुख, न दुख, न भाव और न अनुभव दिखाई देते हैं।

विस्तार

यह दोहा हमें समझाता है कि जब कोई व्यक्ति 'रामरस' यानी ईश्वर के प्रेम या भक्ति में पूरी तरह डूब जाता है, तो फिर उसे कभी कोई दुख छू नहीं सकता। 'रामरस' यहाँ उस अमृत समान दिव्य कृपा को दर्शाता है जो आत्मा को शुद्ध करती है। इस रस में भीगने के बाद, इंसान सुख-दुख, हर्ष-शोक जैसे सारे द्वंद्वों से ऊपर उठ जाता है और ऐसी अवस्था में पहुँच जाता है जहाँ कोई भी लौकिक भाव उसे प्रभावित नहीं करता, बस एक परम शांति रह जाती है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.

← Prev13 / 10