“With bright cloth and paan-supari (betel nut), they eat. Without the name of Hari (God), the village perishes.”
चमकीले वस्त्र और पान-सुपारी खाकर वे भोजन करते हैं। हरि (ईश्वर) के नाम के बिना, पूरा गाँव नष्ट हो जाएगा।
कबीर दास जी इस दोहे में बताते हैं कि कितना भी चमकीला कपड़ा पहन लें या पान-सुपारी के स्वाद का आनंद ले लें, ये सब बाहरी सुख हैं। वे कहते हैं कि इन दिखावटी चीज़ों में उलझकर हम अक्सर जीवन के असली सार को भूल जाते हैं। एक हरि (भगवान) के नाम के बिना, यानी सच्ची भक्ति के बिना, मनुष्य यमपुरी की ओर ही बढ़ता है, जिसका मतलब है कि उसका जीवन अधूरा और व्यर्थ रह जाता है। यह हमें सिखाता है कि भौतिक सुखों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक चेतना ही जीवन को वास्तविक अर्थ देती है।
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