Sukhan AI
कबीरा कलह अरु कल्पना , सतसंगति से जायदुख बासे भागा फिरै , सुख में रहै समाय154

Kabiira, strife and fancy, are eliminated by true company. Sorrow wanders, fleeing always, while happiness resides within.

कबीर
अर्थ

कबीरा, कलह और कल्पना मात्र, सच्ची संगति से दूर हो जाते हैं। दुख हमेशा भागता रहता है, जबकि सुख हृदय में समाया रहता है।

विस्तार

कबीरदास जी यहां समझाते हैं कि जब हम अच्छी संगत में होते हैं, तब हमारे मन के झगड़े और बेवजह की कल्पनाएं अपने आप शांत हो जाती हैं। वह दुख को एक ऐसे मेहमान की तरह देखते हैं जो कभी टिकता नहीं, हमेशा भागता-फिरता है, जबकि सुख हमारे भीतर ही अपना घर बनाकर रहता है। यह दोहा हमें सिखाता है कि सच्ची शांति और खुशी कहीं बाहर नहीं, बल्कि अपने अंदर, नेक सोहबत और आत्म-ज्ञान से मिलती है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.

← Prev52 / 10