“Whenever the name enters the heart, the sins are destroyed. As if a spark of fire falls upon old grass.”
जब भी नाम हृदय में प्रवेश करता है, पाप का नाश हो जाता है। यह ऐसा है जैसे आग की एक चिंगारी पुरानी घास पर पड़ जाए।
यह दोहा बताता है कि जैसे ही हम ईश्वर का नाम अपने हृदय में बसाते हैं, हमारे सारे पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं। कबीर दास जी ने इसे एक खूबसूरत उपमा से समझाया है: मानो आग की एक छोटी सी चिंगारी पुरानी और सूखी घास पर गिर जाए। जैसे वह चिंगारी देखते ही देखते पूरी घास को राख कर देती है, वैसे ही ईश्वर का नाम हमारे मन के सारे मैल और बुरे कर्मों को जलाकर शुद्ध कर देता है, मानो कभी वे थे ही नहीं। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और हृदय से नाम स्मरण की शक्ति कितनी अद्भुत और मुक्तिदायक होती है।
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