शम्अ' के रोने पे बस साफ़ हँसी आती है आतिश-ए-दिल कहीं कम होती है चार आँसू से

“At the weeping of the candle, I can only laugh outright; can the fire within the heart be quelled by tears so slight?”

— मीर अनीस
अर्थ

मुझे शम्अ (मोमबत्ती) के रोने पर बस हँसी आती है, क्योंकि क्या दिल की आग कभी चंद आँसुओं से कम हो सकती है?

विस्तार

शायरी में अक्सर मोमबत्ती (शम्अ) के पिघलते मोम को उसके रोने और दर्द से जोड़ा जाता है, लेकिन शायर को उसकी इस हालत पर साफ़ हँसी आ जाती है। उनका मानना है कि आशिक़ के सीने में जो मोहब्बत और हिज्र की आग धधक रही है, उसके सामने शम्अ के ये चंद बूँद आँसू बेहद मामूली और बेअसर हैं। यह शेर दिल के उस बेपनाह दर्द को दिखाता है जिसे दुनिया की किसी छोटी-मोटी हमदर्दी या चंद आँसुओं से कभी बुझाया नहीं जा सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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