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सब्र था एक मोनिस-ए-हिज्राँ सो वो मुद्दत से अब नहीं आता

Patience, which was a beloved of separation, Does not come now after so long.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

सब्र था एक महबूब-ए-हिज्र, जो बहुत समय से अब नहीं आता।

विस्तार

यह शेर बहुत ही गहरी उदासी को बयां करता है। शायर कहते हैं कि एक समय था जब उनमें विरह का सब्र किसी महबूब जैसा था। लेकिन.... इतनी लंबी मुद्दत गुज़र जाने के बाद, वह सब्र अब नहीं रहा। यह सिर्फ़ महबूब के जाने का दर्द नहीं है, बल्कि उस रूह का थक जाना है, जो इतने सालों के इंतज़ार से चूर हो चुकी है।

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