क्या कहूँ तुझ से कि क्या देखा है तुझ में मैं ने
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा क्या क्या कुछ
“What shall I say to you, what I have seen in you; Ishwa, and sorrow, and style, and grace, what all things.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैं तुमसे क्या कहूँ कि मैंने तुम में क्या-क्या देखा है; इज़्ज़त, और ग़म, और अंदाज़, और अदा—क्या-क्या चीज़ें।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने मोहब्बत की उस गहराई को बयान किया है, जब महबूब की खूबसूरती इतनी ज़्यादा हो कि उसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन हो। शायर कह रहे हैं कि वो इतने सारे नज़ारे देख चुके हैं, कि उन्हें यह बताना मुश्किल है कि क्या कहना है!
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