ख़राब रहते थे मस्जिद के आगे मय-ख़ाने निगाह-ए-मस्त ने साक़ी की इंतिक़ाम लिया

“Before the mosque, the taverns once lay desolate in despair; the Saqi's intoxicating glance has now avenged them there.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मस्जिद के सामने मयखाने वीरान और बदहाल पड़े रहते थे, लेकिन साक़ी की मदहोश नज़रों ने इसका बदला ले लिया।

विस्तार

यहाँ मस्जिद और मयख़ाने का वो चिर-परिचित मुक़ाबला है, जहाँ ज़ाहिरी इबादत और दीवाने इश्क़ के बीच का खिंचाव दिखता है। बरसों से मयख़ाना मस्जिद के रुतबे के सामने वीरान और उपेक्षित पड़ा रहता था, मानो हार मान चुका हो। मगर साक़ी की एक मदहोश कर देने वाली नज़र ने दिलों को ऐसा जीता कि सब इश्क़ के जाम में डूब गए, और मयख़ाने ने अपनी पुरानी बेबसी का बड़ा मीठा इंतिक़ाम ले लिया।

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