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मह ने सामने शब याद दिलाया था उसे फिर वो ता सुब्ह मिरे जी से भुलाया गया

He had reminded me of it in front of me, but that thing was not forgotten by my heart until morning.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैंने यह बात सामने से उसे याद दिलाई थी, फिर भी वह सुबह तक मेरे दिल से भूला न गया।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की शायरी में उस रात के जादू को बयान करता है, जो कभी फीका नहीं पड़ता। शायर कहते हैं कि मैंने उसे सामने ही उस रात की याद दिलाई, लेकिन सुबह होते-होते भी वह उसे भुला नहीं पाया। इसका मतलब है कि वो रात कितनी गहरी और असरदार थी, कि समय भी उसे मिटा नहीं सका। यह इश्क़ के स्थायी निशान की बात है।

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