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तुर्बत से 'आशिक़ों के उठा कभू ग़ुबार जी से गए वले गईं राज़-दारियाँ

The dust of lovers, troubled, was never lifted; / Those who left life, did not leave secrets behind.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

आशिक़ों की तर्बत से कभी ग़ुबार नहीं उठा, और जो लोग जीवन से गए, उन्होंने कोई राज़-दारियाँ नहीं छोड़ी।

विस्तार

यह शेर प्रेम की अमरता और रहस्यों की बात करता है। शायर कहते हैं कि आशिक़ों की क़ब्रों पर जो इश्क़ की धूल है, वह कभी उठी नहीं। और सबसे गहरा अर्थ यह है कि जो लोग दुनिया से चले जाते हैं, वे अपने साथ दिल के राज़ नहीं ले जा सकते। यानी, प्यार के किस्से और यादें हमेशा ज़िंदा रहती हैं।

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