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हम उस से आह सोज़-ए-दिल अपना कह सके थे आतिश-ए-दरूँ से फफोले ज़बान में

We could not tell him the agony of our hearts, For the tongue was blistered by the fire within.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हम उससे दिल का दर्द नहीं कह सके, क्योंकि हमारी ज़बान अंदर की आग से फफोले हो चुकी थी।

विस्तार

यह शेर उस गहरे दर्द को बयां करता है, जो ज़ुबान पर नहीं आ पाता। शायर कह रहे हैं कि दिल का गम इतना ज़्यादा था कि वो उसे महबूब के सामने कह नहीं सके। अंदर की आग इतनी तेज़ थी कि ज़बान पर फफोले पड़ गए.... और बोल पाना नामुमकिन हो गया। यह अनकही मुहब्बत का सबसे बेहतरीन इज़हार है।

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