ग़म खींचने को कुछ तो तवानाई चाहिए
सिवय्याँ न दिल में ताब न ताक़त है जान में
“To draw sorrow, one needs some inclination (or fondness); my heart has neither the readiness nor the strength to bear it.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ग़म को खींचने के लिए कुछ तो झुकाव चाहिए; दिल में न उत्साह है और न जान में शक्ति।
विस्तार
यह शेर दिल की उस हालत को बयां करता है, जब ग़म इतना गहरा हो जाए कि सहना भी मुश्किल हो जाए। शायर कहते हैं कि ग़म को उठाना भी एक ताकत का काम है, और उनके अंदर न तो वह हिम्मत है और न ही वह ताक़त। यह सिर्फ़ उदासी नहीं है, यह आत्मा का थक जाना है। यह एक ऐसा दर्द है जो अंदर से इंसान को पूरी तरह ख़त्म कर देता है।
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