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वे दिन गए कि आतिश-ए-ग़म दिल में थी निहाँ सोज़िश रहे है अब तो हर इक उस्तुख़्वान में

The days have passed when the fire of sorrow was hidden in the heart; now, burning remains in every single vein.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

वह दिन बीत गए जब ग़म की आग दिल में छिपी हुई थी; अब तो हर नस में जलती हुई साजिश बाकी है।

विस्तार

यह शेर दर्द के उस मुकाम को बयां करता है, जब ग़म सिर्फ़ दिल की बात नहीं रहता। शायर कहते हैं कि एक वक़्त था जब यह आतिश-ए-ग़म दिल में छिपी हुई थी... लेकिन अब तो यह सोज़िश हर साँस में, हर उस्ताख़्वान में घुल गई है। यह दिखाता है कि दर्द कितना गहरा हो गया है, कि अब इसे कहीं छुपाया नहीं जा सकता।

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