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मैं नौ-दमीदा बाल चमन-ज़ाद-ए-तैर था पर घर से उठ चला सो गिरफ़्तार हो गया

I was a boy, a spring-born youth, a playboy of the garden, But I left home and became a fugitive.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं नौ-दमीदा बाल चमन-ज़ाद-ए-तैर था, लेकिन घर से उठकर मैं एक भगोड़ा बन गया।

विस्तार

यह शेर एक गहरे दर्द को बयां करता है। शायर कहते हैं कि मैं तो एक ऐसे माहौल में पला-बढ़ा था, जैसे कोई नगीना... जहाँ हर चीज़ से सुरक्षा थी। लेकिन जैसे ही मैंने अपने घर की चौखट पार की, मैं आज़ाद नहीं रहा, बल्कि एक क़ैदी बन गया। यह जीवन की उस कड़वी सच्चाई को दिखाता है, जहाँ निकलना ही सबसे बड़ी क़ैद बन जाता है।

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