क्या शहर में गुंजाइश मुझ बे-सर-ओ-पा को हो
अब बढ़ गए हैं मेरे अस्बाब-ए-कम-असबाबी
“Is there any room in the city for me, who is headless and powerless? My circumstances have now become more complicated than mere affairs.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या इस शहर में किसी जगह है मेरे लिए, जो सिर रहित और शक्तिहीन हूँ? अब मेरी परिस्थितियाँ सिर्फ साधारण मामलों से कहीं अधिक जटिल हो गई हैं।
विस्तार
यह शेर उस बेबसी और अकेलेपन को बयां करता है जब इंसान खुद को किसी जगह के लिए अनुपयुक्त महसूस करता है। शायर पूछते हैं कि क्या इस शहर में किसी बे-सिर-ओ-पा (दिशाहीन) को कोई जगह है? और दूसरी लाइन बताती है कि उनकी अपनी कमियाँ और हालात इतने बढ़ गए हैं कि अब कहीं भी एडजस्ट नहीं हो पा रहे। यह एक गहरी आत्म-पीड़ा है।
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