गुज़रा बना-ए-चर्ख़ से नाला पगाह का
ख़ाना-ख़राब हो जियो इस दिल की चाह का
“From the spinning wheel's passing, the stream of sorrow flows, May the house of this heart's desire fall to ruin and decay.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
चक्र के घूमते जाने से, दुख की नदी बहती है; मेरे इस दिल की चाहत का घर नष्ट हो जाए।
विस्तार
यह शेर भौतिक विरह और भावनात्मक दर्द के बीच के गहरे अंतर को समझाता है। शायर कहते हैं कि किसी जगह या रास्ते को छोड़ना तो बस एक शारीरिक क्रिया है, जो आसान है। लेकिन असली संघर्ष, असली पीड़ा तो दिल की चाहत के टूटने, उसके 'ख़राब' हो जाने में है। यह आंतरिक तबाही है, जो इंसान को सबसे ज़्यादा सताती है।
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